नवजोत सिद्धू ने बहुत सोच-समझकर इस्तीफा दिया, ये है रणनीति !


सब पूछ रहे हैं नवजोत सिंह सिद्धू ने इस्तीफा क्यों दिया
? ‘मलाई का कटोरा मिलने के बाद राजनीति में ऐसा कौन करता है ? कोई सिद्धू को बेवकूफ साबित करने में लगा है तो कोई उनको अस्थिर बता-बताकर अपने फेफड़े सुजाए ले रहा है। कुछ तो डीपीजी जैसे पद पर अपनी मनपसंद का व्यक्ति न चुने की नाराजगी बता रहे हैं। दशकों से राजनीति बीट कवर करने वाले वरिष्ठ संवाददाता भी चैनलों पर आंय-बांय सांय बोले जा रहे हैं।

दरअसल सिद्धू ने अमरिंदर जैसे पहाड़ को अपने रास्ते से हटाने के लिए जो महायुद्ध लड़ा था, उसकी जीत का सेहरा तो उनको मिला, लेकिन राजगद्दी कोई और ले उड़ा। सियासत यहां बेहद दिलचस्प हो गई है। सिद्ध ने चन्नी को सीएम पद दिलवाने में भले अहम भूमिका निभाई, लेकिन जल्दबाजी में एक रणनीतिक चूक कर गए। उस समय वे ये अन्दाजा नहीं लगा पाए कि चन्नी एक बार सीएम बन गए तो अगले चुनाव के लिए भी कांग्रेस को उन्हीं को चेहरा बनाना पड़ेगा। अगर नहीं बनाया तो बीजेपी, अकाली दल और आम आदमी पार्टी पूरे देश में कांग्रेस का जीना हराम कर देंगे।

उसके बाद दबाव में आई कांग्रेस ने चन्नी का इस्तेमाल करते हुए पूरे देश में दलित कार्ड भी खेल दिया, सिद्धू को इसका अंदाज़ा थोड़ी देर से हुआ। अब कांग्रेस आलाकमान के लिए चन्नी केवल पंजाब के सीएम नहीं हैं, बल्कि पूरे देश में कांग्रेस का दलित चेहराहैं। ऐसे में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष रहे सिद्धू को समझ में आ गया, अगले चुनाव के बाद भी उनको सीएम का पद तब तक नहीं मिल पाएगा, जब तक की कांग्रेस आलाकमान अभी साफ तौर से इसका ऐलान न कर दे। इस ऐलान में जितनी देर होती जाएगी, सीएम चन्नी, आलाकमान के लिए उतने ही खास होते जाएंगे। अब भला अमरिंदर से टकराकर गद्दी छीनें सिद्धू, अगले चुनाव में स्टार प्रचारक बनकर कांग्रेस को अपने कंधे पर उठाकर फिर जिताने की जिम्मेदारी उठाएं सिद्धू, विरोधी पार्टियों के निशाने पर आएं सिद्धू और फिर भी न सीएम पद मांग सकेंगे और न ही खुलकर मीडिया में कुछ कह पाएंगे। आलाकमान अलग उनको तवज्जो नहीं दे रहा। ऐसे में सबसे सही यही है कि अभी कांग्रेस आलाकमान पर पूरा दबाव डालकर अपनी डील फाइनल करवा लो, नहीं तो किनारे बैठकर तमाशा देखो। कम से कम तब अगर कांग्रेस चुनाव हारी तो सिद्ध पर ठीकरा तो नहीं फूटेगा। भविष्य में उनकी क्षमता पर कोई सवालिया निशान तो नहीं लगा पाएगा ? मज़े की बात ये है कि इस्तीफे के लिए सिद्धू ने दिन भी कौन सा चुना, जब कांग्रेस कन्हैया कुमार को पार्टी में शामिल करवाकर कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश कर रही थी, सिद्धू ने गुब्बारे की हवा निकाल दी। ज़ाहिर है वे कुछ भी कर सकते हैं। सिद्धू का गोल बिल्कुल साफ है, पंजाब का सीएम बनना। जिस तरह से चन्नी कैबिनेट के दो मंत्रियों परगट सिंह और रजिया सुल्ताना ने सिद्धू के समर्थन में इस्तीफा दिया और पूरी चन्नी सरकार उनको मनाने दौड़ पड़ी, उससे साफ है कि सिद्धू एक बार फिर अपनी ताकत ठीक से दिखा देना चाहते हैं, ताकि अमरिंदर खेमा भी उन पर हमला करने से पहले सोचा। वैसे अमरिंदर को भी अब बेटे के लिए बैटिंग करने और सिद्धू को निपटाने का एक और मौका मिल गया, जिसका इस्तेमाल वो सही तरीके से करेंगे।  

 

 

 

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