नया न्यूज चैनल यानी काम हो कुछ हटकर
नवीन पाण्डेय 'निर्मल' टे लीविजन न्यूज चैनल एक बेहद कड़े मुकाबले वाले दौर में पहुंच गए हैं। ऐसे में किसी भी नए चैनल को मार्केट बनाने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है। ऐसा कुछ भी नहीं बचा है, जो आप पहली बार करने जा रहे होगे। लेकिन ऐसा बहुत कुछ है, जो आप नए अंदाज में कर सकते हो। इसलिए सारा खेल अंदाज यानी प्रजेन्टेशन का। किसी भी बड़े चैनल की कॉपी करने से अच्छा है, कुछ फ्रेश और नए तरह से करना। दिन भर एक ही खबर को घिसने रहने से अच्छा है, किसी बड़ी खबर पर शो प्लान करना- जिसमें लोगों को जोड़ा जा सके। कुछ लोग दावा करते हैं कि हम गंभीर चैनल हैं, लेकिन ऐसी गंभीरता किस काम की, जिसको देखते हुए नींद आ जाए। किसी समस्या पर ‘सैटायर’ मारके आप ज्यादा बड़ी बात कर सकते हो, और लोगों तक आसानी से मैसेज पहुंचा सकते हो। टेलीविजन की अधिकांश टीआरपी मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े महानगरों से आती है, इसलिए यहां की हर छोटी बड़ी घटना खबर बनती है. लेकिन यहां के दर्शकों का विश्वास जीतना बेहद मुश्किल है। खबरों को लेकर इनका भरोसा ज्यादातर आज तक, स्टार, एनडीटीवी और जी न्यूज जैसे बड़े...