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इस मुंडे को मनाऊ कैसे?

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प हले ही आपसी गुटबाजी में उलझी बीजेपी के सामने एक और संकट खड़ा हो गया है। कल्याण सिंह और बाबूलाल मरांडी के नक्शेकदम पर चल पड़े हैं महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री और लोकसभा में उपनेता गोपीनाथ मुंडे। तमाम तरह के नुकसान करने के बाद छह साल बाद किसी तरह उमा भारती की पार्टी में वापसी हुई तो ऐन उसी वक्त महाराष्ट्र में पार्टी के कद्दावर नेता गोपीनाथ मुंडे पार्टी छोड़ने की धमकी दे रहे हैं। हो सकता है, इस धमकी में ज्यादा दम न हो, लेकिन इसने पहले ही आंतरिक गुटबाजी की शिकार पार्टी में दहशत जरूर ला दी है। सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा तो ये पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के लिए है, जिनके सिर अपने ही गृहराज्य की कलह खत्म न करा पाने के आरोप चस्पां हो गए हैं। संगठन के बेस्ट मैनेजर बताए जाते रहे गडकरी की साख दांव पर है और वे दोनों ओर से फंसे दिखते हैं, अगर वे मुंडे की मांगें मानते हैं, तो अपने समर्थकों के सामने कमजोर पड़ते हैं और अगर मुंडे की उपेक्षा करते हैं तो डर है वे पार्टी ही न तोड़ दें। मुंडे इस मांग पर अड़े हैं कि उन्हें भी परंपरा तोड़कर महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया जाए ( हालांकि प्रमोद महाजन और कल्...

नया न्यूज चैनल यानी काम हो कुछ हटकर

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नवीन पाण्डेय 'निर्मल' टे लीविजन न्यूज चैनल एक बेहद कड़े मुकाबले वाले दौर में पहुंच गए हैं। ऐसे में किसी भी नए चैनल को मार्केट बनाने में एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है। ऐसा कुछ भी नहीं बचा है, जो आप पहली बार करने जा रहे होगे। लेकिन ऐसा बहुत कुछ है, जो आप नए अंदाज में कर सकते हो। इसलिए सारा खेल अंदाज यानी प्रजेन्टेशन का। किसी भी बड़े चैनल की कॉपी करने से अच्छा है, कुछ फ्रेश और नए तरह से करना। दिन भर एक ही खबर को घिसने रहने से अच्छा है, किसी बड़ी खबर पर शो प्लान करना- जिसमें लोगों को जोड़ा जा सके। कुछ लोग दावा करते हैं कि हम गंभीर चैनल हैं, लेकिन ऐसी गंभीरता किस काम की, जिसको देखते हुए नींद आ जाए। किसी समस्या पर ‘सैटायर’ मारके आप ज्यादा बड़ी बात कर सकते हो, और लोगों तक आसानी से मैसेज पहुंचा सकते हो। टेलीविजन की अधिकांश टीआरपी मुंबई, दिल्ली जैसे बड़े महानगरों से आती है, इसलिए यहां की हर छोटी बड़ी घटना खबर बनती है. लेकिन यहां के दर्शकों का विश्वास जीतना बेहद मुश्किल है। खबरों को लेकर इनका भरोसा ज्यादातर आज तक, स्टार, एनडीटीवी और जी न्यूज जैसे बड़े...

दे ही दिया पाकिस्तान को खिल्ली उड़ाने का मौका ?

आ तंकवाद के खिलाफ लड़ाई में हमारी तैयारी कैसी है, इसकी पोल पट्टी एक बार फिर बुरी तरह खुल गई है। ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद भारत के पास जो रणनीतिक बढ़त आई है, नौकरशाही की बड़ी चूक ने उसको कलम कर दिया है। मोस्ट वांटेड आतंकियों की जो लिस्ट भारत ने पाकिस्तान को सौंपी है, उसमें महाराष्ट्र के ठाणे में रहने वाले वजाहुल कमर खान का नाम भी डाल दिया गया. वजाहुल कमर खान को एटीएस ने 10 मई 2010 को मुंबई के कुर्ला इलाके से 2003 के मुलुंड ट्रेन धमाकों के आरोप में गिरफ्तार किया था। इसके अलावा तीन अन्य आतंकी मामलों में वजाहुल के खिलाफ पोटा कोर्ट में केस चल रहे हैं। वजाहुल अपनी मां, पत्नी और पांच बच्चों के साथ ठाणे के वागले एस्टेट में रहता है। जब ये सच्चाई सामने आई तो गृहमंत्री पी चिदंबरम बगलें झांकते दिखाई दे रहे थे। जिस शख्स पर अपने ही देश में मुकदमा चल रहा है, नौकरशाहों ने उसका नाम मोस्ट वांटेड आतंकियों की सूची में डालकर बैठे बिठाए पाकिस्तान को मुद्दा थमा दिया। मामले की पोल खुलने के बाद गृह मंत्रालय की तो किरकिरी हो ही रही है, सबसे बड़ी चोट आतंकवाद के खिलाफ हमारे क...

अब तो 'राइट' हो जाओ लेफ्ट

यह तो अब सभी जान गए हैं कि बंगाल में बदलाव की बयार चली और ममता बनर्जी की आंधी में लेफ्ट का लाल किला भरभरा कर ढह गया। लेकिन इसके बाद सवाल उठता है कि क्या वाम विचारधारा अब भी इस देश में वजूद बचा पाएगी या फिर देश दो ध्रुवीय व्यवस्था की ओर जा रहा है। तो ऐसे में क्या वामपंथी देश के लिए जरूरी है। इस सवाल का जवाब पाने के लिए देश के मौजूदा हालात पर तनिक गौर करना होगा। विकास के तमाम दावों और रफ्तार पकड़ती अर्थव्यवस्था के लुभावने आंकड़ों के बीच महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है, कृषि संकट भयावह रूप लेता जा रहा है, अमीर और अधिक धनी हो रहे हैं गरीब किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं। बेरोजगारी विकराल रूप लेकर सामने खड़ी है और भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया है। कई लाख करोड़ के घोटाले अब आम जनता को भले ही दुखी करते हों, लेकिन उसे चौंकाते कतई नहीं। जेल जाते ए राजा हों, कलमाडी हों या बड़ी कंपनियों के दिग्गज अधिकारी, लोगों को पता है, आखिरकार इनका कुछ नहीं बिगड़ना है। इससे भी बड़ी बात है, अधिकांश मौकों पर सरकार लाचार की तरह सामने आती है और विपक्ष बेदम दिखता है। ऐसी स्थिति में...