इस मुंडे को मनाऊ कैसे?
प हले ही आपसी गुटबाजी में उलझी बीजेपी के सामने एक और संकट खड़ा हो गया है। कल्याण सिंह और बाबूलाल मरांडी के नक्शेकदम पर चल पड़े हैं महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री और लोकसभा में उपनेता गोपीनाथ मुंडे। तमाम तरह के नुकसान करने के बाद छह साल बाद किसी तरह उमा भारती की पार्टी में वापसी हुई तो ऐन उसी वक्त महाराष्ट्र में पार्टी के कद्दावर नेता गोपीनाथ मुंडे पार्टी छोड़ने की धमकी दे रहे हैं। हो सकता है, इस धमकी में ज्यादा दम न हो, लेकिन इसने पहले ही आंतरिक गुटबाजी की शिकार पार्टी में दहशत जरूर ला दी है। सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा तो ये पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी के लिए है, जिनके सिर अपने ही गृहराज्य की कलह खत्म न करा पाने के आरोप चस्पां हो गए हैं। संगठन के बेस्ट मैनेजर बताए जाते रहे गडकरी की साख दांव पर है और वे दोनों ओर से फंसे दिखते हैं, अगर वे मुंडे की मांगें मानते हैं, तो अपने समर्थकों के सामने कमजोर पड़ते हैं और अगर मुंडे की उपेक्षा करते हैं तो डर है वे पार्टी ही न तोड़ दें। मुंडे इस मांग पर अड़े हैं कि उन्हें भी परंपरा तोड़कर महाराष्ट्र का प्रभारी बनाया जाए ( हालांकि प्रमोद महाजन और कल्...